अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की सार्थकता ध्यान में रख पुणे में कुछ महिलाओ को साथ ले इक पहल करने की कोशिश की। लगभग ३५ घेरेलु और कामकाजी महिलाये साथ आई और सभी ने बात रखी। विषय का बंधन नहीं था पर सबको बोलना जरूरी किया गया । सबकी प्रतिभा सामने आई । ये वे महिलाये थी जिन्हें जिन्दगी ने बहुत कुछ बना दिया था पर वे खुद खो गई थी।
सबसे पहले परिचय देने को कहा गया, और २२ साल से ६० साल की महिलाओ को इक दुसरे की सखी बनाने की गरज से उन्हें उनके पहले नाम से संबोधन करने को कहा। देखते देखते उनका सबसे तो परिचय हुआ ही खुद से भी नया परिचय हुआ...जेसे मै ही साराक्षी की माँ और अभिनय की पत्नी से फिर हो गई केवल स्वरांगी ...
संयोजक
स्वरांगी
शुक्रवार, 26 मार्च 2010
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